
बारां। बारां निवासी, भारत-पाक युद्ध के वीर सैनिक एवं शहर में “फौजी” के नाम से प्रसिद्ध समाजसेवी किशन लाल अदलखा का आज देवलोक गमन हो गया। उनके निधन के पश्चात परिजनों द्वारा लिया गया नेत्रदान का निर्णय न केवल एक परिवार की महान सोच को दर्शाता है, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है।
किशन लाल अदलखा ने वर्ष 1965 एवं 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना के सिपाही के रूप में राष्ट्र की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। युद्धकाल में अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा के कारण वे शहर में ससम्मान “फौजी” के नाम से पहचाने जाने लगे। उन्होंने लगभग 20 वर्षों तक भारतीय सेना में सेवाएं दीं और सेवानिवृत्ति के बाद भी समाजसेवा से जुड़े रहे।
निधन के उपरांत पंजाबी समाज के पूर्व अध्यक्ष महेश अदलखा द्वारा परिजनों से संपर्क कर उन्हें नेत्रदान के महत्व से अवगत कराया गया। इस पर स्व. किशन लाल अदलखा के पुत्र इंद्रजीत अदलखा, पुत्रवधू मनीषा अदलखा, पुत्रियां कुसुम व कविता, तथा परिवार के अन्य सदस्य राजकुमार, ललित गेरा, राकेश सहित सभी परिजनों ने सर्वसम्मति से नेत्रदान की स्वीकृति प्रदान की।
कोटा से शाइन इंडिया फाउंडेशन बीबी चैप्टर के प्रतिनिधि कुलवंत गौड़ बारां पहुंचे और पूरी संवेदनशीलता एवं गरिमा के साथ नेत्रदान की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।
इस अवसर पर भारत विकास परिषद के सचिव एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन के नगर संयोजक हितेश खंडेलवाल ने बताया कि स्व. किशन लाल अदलखा शहर के प्रतिष्ठित समाजसेवी थे। वे पंजाबी समाज के संरक्षक रहे तथा ट्रक यूनियन के संस्थापक सदस्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, अनुशासन और समाजहित को समर्पित रहा।
भारत विकास परिषद के अध्यक्ष नरेश खंडेलवाल ने कहा कि बारां शहर में नेत्रदान को लेकर निरंतर जागरूकता बढ़ रही है और समाज अब इसे एक महादान के रूप में स्वीकार कर रहा है। स्व. अदलखा परिवार द्वारा किया गया यह कार्य निश्चित ही आने वाले समय में अनेक दृष्टिहीनों के जीवन में उजाला लाएगा।
एक युद्धवीर का जीवनोपरांत भी मानव सेवा में समर्पित हो जाना यह सिद्ध करता है कि सच्चे सिपाही न केवल सीमा पर, बल्कि समाज के लिए भी अमर होते हैं। स्व. किशन लाल अदलखा का यह नेत्रदान उन्हें सदैव स्मरणीय बनाए रखेगा।
Author: Third Eye News 24
सत्यमेव जयते




