गोदियापुरा में आयोजित संगीतमय भागवत कथा में किया श्रीकृष्ण की बाल लीला का वर्णन
बारां। शहर के समीपवर्ती ग्राम गोदियापुरा-दुर्जनपरा स्थित भगवान चतुर्भुजनाथ मंदिर परिसर में आयोजित हो रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में छठे दिन शुक्रवार को श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। इस दौरान प्रस्तुत किए गए भजनों की धुन पर श्रद्धालुओं ने नृत्य किया।
कथा-प्रवचन में पंडित सुरेशानंद शास़्त्री ने वृंदावन धाम से लेकर भगवान श्रीकृष्ण द्वारा द्वारका नगरी बसाने तक का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि हर प्राणी का हर गृहस्थ में भगवान की भक्ति और भजन करना चाहिए। चाहे धन करोड़ों में या अरब में। भगवान की प्राप्ति भक्ति से होती है, धन से नहीं। कहा कि भक्ति से भगवान मिलते हैं। शुभ कर्म के फल भी शुभ ही होते हैं। भगवान की प्राप्त करने का यह भी एक मार्ग है।
सुरेशानंद महाराज ने कथा में कहा कि श्रीकृष्ण ने बाल लीलाओं के दौरान ही गाकुल व वृदावनवासियों को कंस के आतंक से मुक्ति दिला दी। मथुरा पहुंचकर उन्होंने अपने भाई के साथ मिलकर कंस का भी वध कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपने माता-पिता को जेल से मुक्त कराया। उनके दर्शन किए। श्रीकृष्ण ने 64 दिन में विद्या ग्रहण की। मथुरा से भगवान द्वारका गए। जहां द्वारका नगरी को बसाया तथा रूकमणि से मंगल विवाह किया। कंस के मुक्त कराई गई 16108 रानियों को आश्रय दिया। कृष्ण कहते हैं कि पहली ध्वनि गरूड़ ध्वनि, दूसरी शंख व तीसरी गाय के रंभाने की होती है। जिस घर में ये तीन ध्वनियां होती है। वह घर नहीं, साक्षात बैकंुठ धाम होता है।

पुजारी चंद्रप्रकाश शर्मा ने बताया कि कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्म व बाल लीला की झांकी सजाई गई। इससे पूर्व हेमराज नागर, रामदयाल नागर ने व्यास पीठ का पूजन किया। वहीं राधेश्याम नागर, महेश शर्मा, नाथूलाल नागर, गोलू नागर आदि ने आरती की।
फोटो 1 बारां।
Author: Third Eye News 24
सत्यमेव जयते




