बारां । विश्व चीता दिवस के अवसर पर पंचफल बोटनिकल गार्डन कुन्जेड और भारतीय सांस्कृतिक निधि वराह नगरी बारां अध्याय द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी में सामाजिक कार्यकर्ता और शाहबाद घाटी संरक्षण समिति बारां के संरक्षक प्रशांत पाटनी ने मुख्य अतिथि बतौर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ” आज जंगल में चीता होना बहुत जरूरी है.। हमारे किसानों के लिए नीलगाय, हिरण और सूअर इनकी बढ़ती हुई आबादी चिंता का विषय है इन जानवरों की वजह से खेती करना मुश्किल हो जाता है ।”
उन्होंने कहा कि “चीता एक शीर्ष शिकारी है, जो जंगल की खाद्य श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह मुख्य रूप से हिरण, जंगली सूअर, नीलगाय जैसे शाकाहारी जानवरों का शिकार करता है जिससे उनकी आबादी नियंत्रित रहती है। इससे वनस्पतियों का संतुलन बना रहता है और जंगल की पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित एवं स्वस्थ रहती है। इससे किसानों की खेती के लिए खतरा बने नीलगाय, हिरण और सूअर की बढ़ती हुई आबादी नियंत्रित रहती है।”
कार्यक्रम में बारां से आए इंटेक के संयोजक एवं पर्यावरण एक्टिविस्ट जितेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि” बारां जिले के रामगढ़ क्रेटर फॉरेस्ट रिजर्व में कूनो से आए मेहमान चीता का मूवमेंट होना बारां जिले के लिए खुशखबरी है। पांचवीं बार बारां जिले के जंगलों में चीता आना यह दर्शाता है कि यहां के जंगल चीता हैबिटेट के लिए अनुकूल है। यदि चीता यहां के जंगलों में अपने टेरिटरी बना लेता है तो इससे बारां जिले में इको एवं वाइल्डलाइफ टूरिज्म डेवलप होगा। ”
युवा किसान नेता दीपक यादव ने कहा कि “प्रधानमंत्री के द्वारा शुरू किया गया कूनो चीता प्रोजेक्ट की सफलता के लिए कूनो नेशनल पार्क से शाहबाद कंजर्वेशन रिजर्व फॉरेस्ट से होकर गांधी सागर का चीता कॉरिडोर बनाया जाना जरूरी है। इस कॉरिडोर एवं चीता के मूवमेंट में यदि ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के हाइड्रो पावर प्लांट से बाधा आती है तो उसे अन्यत्र शिफ्ट किया जाए।”
युवा किसान विजेश मालव ने कहा कि”चीता का बारां के जंगलों के लिए एवं खेती किसानी के लिए बहुत जरूरी बताया उन्होंने कहा कि इससे नीलगाय और सूअर की आबादी कंट्रोल में आएगी तथा उन्होंने बारां जिले के ही शेरगढ़ फॉरेस्ट रिजर्व को भी चीता के लिए अनुकूल बताया।”
विचार गोष्ठी में विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि कूनो नेशनल पार्क से आए मेहमान चीता के पी-2 के नेचुरल मूवमेंट को बाधित नहीं किया जाए तथा ट्रेंकुलाइज करके फोर्सफुली वापस कूनो सेंचुरी में नहीं ले जाया जाए। सहभागियों का मानना था कि
बारां वन मंडल से वन कर्मियों का एक दल कूनो नेशनल पार्क प्रशिक्षण के लिए भेजा जाए जो कि चीता की ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग एवं अन्य संबंधित गतिविधियों की ट्रेनिंग लेकर आए साथ ही
एनटीसीए ने चीता एक्शन प्लान के अंतर्गत चीता के मेटा पापुलेशन मैनेजमेंट में चीता विचरण के लिए निर्धारित मापदंडों के अनुसार 17हजार वर्ग किलोमीटर का कूनो से लेकर गांधीसागर अभयारण्य तक चीता कॉरिडोर लैंडस्केप का जो निर्धारण किया गया है इस कार्य योजना पर अमल किया जाए।
शाहबाद कंजर्वेशन रिजर्व फॉरेस्ट में से होकर ही चीता का कॉरिडोर गुजरता है जोकि बिल्कुल कूनो नेशनल पार्क से सटा हुआ है। यहां से मात्र 40 किलोमीटर कूनो की दूरी है। यदि यहां ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड की बिजली परियोजना जो कि प्रस्तावित है स्थापित की जाती है तो यहां की औद्योगिक गतिविधियों से प्रधानमंत्री का महत्वाकांक्षी चीता प्रोजेक्ट जो उनकी पहल पर नामीबिया एवं दक्षिणी अफ्रीका से लाकर चीते बसाए थे। फेल हो जाएगा। विचार गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ किसान राम प्रसाद योगी ने की। पंचफल बोटनिकल गार्डन कुन्जेड के प्रतिनिधि की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
Author: Neeta Sharma
free Lancer, writer and editor




