बारां। कौशल्या देवी शर्मा द्वारा राजस्थान की लोक संस्कृति को लेकर बनाए गए मांडने अपने आप में बेमिसाल और अनुकरणीय कार्य है उनके योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। ये विचार ख्यातनाम शायर तौकीर हैदर आब्दी ने युवा मंडल संस्थान बारां द्वारा श्रीमती कौशल्या देवी शर्मा की 83 वीं जयंती और उर्दू के स्थापित शायर अल्लामा इकबाल की 148 वीं जयंती पर गत दिन आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि “अल्लामा इकबाल जैसे शायर इस मुल्क की शायरी और उर्दू तहजीब के प्रतीक है जिनकी जितनी तारीफ की जाए उतनी ही कम है।“ इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदा की पूजा अर्चना और नाते पाक से हुआ। कार्यक्रम में सहभागियों ने अल्लामा इकबाल और श्रीमती कौशल्या देवी शर्मा की विरासतों पर चर्चा की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सैय्यद तौकीर हैदर आब्दी, विशिष्ट अतिथि भैरूलाल भास्कर थे। अध्यक्षता सरफुद्दीन राही,रजा बारानवी ने की। कार्यक्रम में मेवाराम चौधरी, अनाथूलाल निर्भय, हीरालाल कामेलिया और अन्य रचनाकारों ने हिन्दी और उर्दू के कलामात पेश किए। संचालन जितेन्द्र शर्मा पम्मी ने किया।
Author: Third Eye News 24
सत्यमेव जयते




