बारां। अब से तीन दशक पूर्व शहर से डोल मेला परिसर में तत्कालीन नगर पालिका द्वारा शहर के मध्य ख्यात नाम डोल मेला परिसर में मेले का समय आतेही मेला मैदान को व्यवस्थित करने के लिए इतनी मिट्टी डाली जा चुकी है कि अब तक यह परिसर इतने ही राशी के खर्च में पक्की सड़को से लवरेज दिखाई देता 30 वर्ष में इतनी मिट्टी डल चुकी कि पूर्व में बर्तन बाजार व कपड़ा बाजार में व्यापारियों की सुविधा के लिए जो पक्के थडे बने हुए थे। वह भी मिट्टी डलते-डलते जमीदोज हो चुके। इसे मिट्टी पर कमीशन के खेल की मार ही कहा जा सकता है कि प्रतिवर्ष नगर परिषद द्वारा मेला परिसर में मिट्टी डालकर उसे थोड़े समय के लिए मिट्टी की मरम पट्टी लगा से ठीक किया जाता हैं। जिस पर प्रतिवर्ष लाखों रुपए खर्च किया जाता हैं। पूर्व पार्षद ललित मोहन खंडेलवाल, ओमप्रकाश चक्रवर्ती, प्रेम शंकर माली, प्रेम खींची, ने बताया कि तीन दशक पूर्व यहां तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष बाबू बालमुकुंद एडवोकेट के कार्यकाल में कपड़ा बाजार व बर्तन बाजार में पक्के थडो का निर्माण किया गया था।
जिस पर व्यापारी आसानी से अपनी दुकान लगाकर मेले में कारोबार करते थे। लेकिन अधिकारियों द्वारा कमीशन के खेल के कारण अब तक वहां पक्की सड़कों का निर्माण नहीं कराया गया। मिट्टी डाले जाने से वह थडे भी पूरी तरह मिट्टी में ढक कर जमीदोज हो गए। मेला परिसर क्षेत्र के लोगों ने नगर परिषद प्रशासन से आग्रह करते हुए कहा कि बार-बार मिट्टी डालने के स्थान पर अगर एक ही बार यहां पक्की सड़कों का निर्माण करवा दिया जाए। तो प्रतिवर्ष लाखों रुपए की मिट्टी डाले जाने का खेल भी समाप्त हो सकता हैं। इस बार मेला क्षेत्र का सौंदर्य भी बढ़ सकता हैं। अगर एक बार पक्की सड़के के बना दी जाए और मेला अवधि के बाद यह क्षेत्र व्यापारियों के लिए सब्जी मंडी के रूप में व्यवस्थित हो सकता हैं। मेला समाप्त होने के बाद जो सब्जी मंडी रुपया बीड़ी चौक व फूल पीर बाबा की मजार के सामने लगती हैं। वह इस क्षेत्र में व्यवस्थित की जा सकती हैं। प्रतिमाह किराए से नगर पालिका को अच्छी आमद भी हो सकती हैं।
Author: Third Eye News 24
सत्यमेव जयते




