राष्ट्रीय किसान समन्वय समूह की चिंतन बैठक
बारां। ग्राम स्वराज क्यों और कैसे विषय पर आयोजित राष्ट्रीय किसान समन्वय समूह की बैठक के दूसरे दिन देश के विभिन्न भागों से आए किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि विकसित भारत का रास्ता ग्राम स्वराज से ही जाएगा। ग्रेटर नोएडा के किसान नेता एडवोकेट सुनील फौजी ने कहा कि हमारी जमीनों और संसाधनों को लूटकर कौन सा विकसित भारत बनाना चाहते हैं। यह सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने भूमि अधिग्रहण कानून की जानकारी देते हुए बताया कि भूमि अधिग्रहण कानून में इतनी पैचिदिगियां है कि न खेती रहेगी, न किसानी और न न्यूनतम समर्थन मूल्य।
मुख्य वक्ता कर्नाटक गुलबर्गा किसान संगठन के अध्यक्ष दयानंद पाटिल ने नीतिगत सत्र की अध्यक्षता करते हुए कहा कि ग्राम स्वराज और पंचायत के अंतर को गांव गांव में समझना आवश्यक हैं। इसके लिए राष्ट्रीय किसान समूह देश भर में क्षेत्रवार किसान प्रतिनिधियों की नियुक्ति कर उनके माध्यम से गांव में ग्राम स्वराज के प्रति अलख जगाने का काम करेगी। जयपुर के प्रोफेसर रामगोपाल मोदानी ने बताया कि समूह ने देश के विभिन्न भागों में किसान प्रतिनिधियों से समन्वय बनाते हुए चर्चाएं शुरू करने का सुझाव दिया। दशरथ कुमार ने कहा कि हमें अलग से संस्था न बनाते हुए महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज को गांव गांव पहुंचाना है। हरियाणा की किसान नेता डीके शर्मा ने बताया कि कहा कि हर राज्य में सरकारी जल जंगल जमीन की सौदेबाजी कर पंचायत एक्सटेंशन शेड्यूल एक्ट-1996 पेसा कानून का उल्लंघन कर रहीं हैं। इस कानून में उल्लेख है कि औद्योगिक इकाइयों को जो किसानों से जमीन लेती हैं।
ग्राम सभा के माध्यम से उनका 50 लाभांश ग्राम सभा को मिलेगा 24 लाभांश भूमि के मालिक को तथा 26 लवण निवेदक को प्रदान किया जाएगा। लेकिन देश में कहीं भी इस कानून का पालन नहीं हो रहा। इस अवसर पर राष्ट्रीय किसान समन्वय समूह के संयोजक किसान नेता दशरथ कुमार को लोकतंत्र सेनानी सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर चंबल संसद के संयोजक बृजेश विजयवर्गीय ने जल जंगल, जमीन को खेती व किसानी के हित में बताते हुए किसान प्रतिनिधियों की जागरूकता पर जोर दिया। वनों को कृषि की धाय मां बताते हुए उन्होंने वनों के संरक्षण को खेती का संवर्धन बताया। विजयवर्गीय ने बारां में शाहाबाद के जंगल को काटकर बिजली प्राप्त लगाने की योजना को निरस्त करने की मांग की।
सीतामढ़ी बिहार के किसान नेता डॉ. बृजेश कुमार शर्मा, भोपाल के इमरान जाफरी आदि ने ग्राम स्वराज का प्रस्ताव लागू करने की सरकार से मांग की और कहा कि पंचायत राज व्यवस्था में इस महत्वपूर्ण विषय की उपेक्षा हो रही है। उन्होंने ग्राम स्वराज को विकास का मॉडल बताते हुए गांव गांव में इसकी वकालत करने पर जोर दिया। परवन बांध परियोजना के किसान नेता पवन यादव, हरीश शर्मा, रामावतार मीणा, सहकार नेता रामगोपाल शर्मा, उदयपुर के वीरेंद्र लोबो, आगरा के अंशुमान ठाकुर जितेंद्र त्यागी दिल्ली के हरेंद्र गुर्जर संजय भाटी, जितेंद्र चौधरी आदि ने विचार व्यक्त किए। राष्ट्रीय युवा संगठन के संयोजक जगदीश शर्मा ने बताया कि रविवार को चिंतन बैठक के समापन पर ग्राम स्वराज को जन जन तक पहुंचाने की कार्य योजना तय की जाएगी।
Author: Third Eye News 24
सत्यमेव जयते




