साधर्मिक बंधुओं ने बताया प्रभु जन्मोत्सव के बारे में
बारां। श्री जैन श्वेताम्बर नवयुवक मण्डल के अध्यक्ष राजेन्द्र रंगावत, श्याम मूथा, निर्मल पोरवाल, दिनेष श्रीमाल संस्कार वेद ने बताया कि पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व की आराधना करवाने हेत। उपासना मंदिर अरिहंत बंगलो-मुम्बई (महाराष्ट्र) से पधारे साधर्मिक क्रिश सतीश भाई रांका, कलश अश्विनी भाई ने पर्यूषण पर्व के छठें दिन बताया कि प्रतिदिन सूर्योदय होता है, और अस्त हो जाता है। धर्म, आराधाना में ध्यान नहीं रहता है कि कितने दिन निकल गए। ‘‘साकडा भाई पर्वना दहाडा’’ यह कहावत यहां सच जान पडती है। प्रभु का जन्म होने के बाद 56 दिक्कुमारियां जन्मोत्सव करती है।

उसके बाद 64 इन्द्र मेरूशिखर के ऊपर असंख्य देवों के साथ जन्मोत्सव करते है। इन्द्र को मन में शंका हो रही है कि बालक जन्माभिषेक के इतने अधिक जल को किस प्रकार सहन करेगा। अवधिज्ञानी प्रभु ने उसका सम्यक ज्ञान मलीन ना हो जाए। इसलिए सहन सहनभाव से अंगूठे से मेरू को चलायमान करके उसकी शंका का निवारण किया। मेरू पर्वत के ऊपर देवों ने उल्लास पूर्वक जन्मोत्सव किया। पूर्व कृत संकल्प अनुसार माता-पिता ने वर्धमान नामकरण किया। सहभावी तप करणादि शक्ति होने से उनका दूसरा नाम ‘‘श्रमण’’ पडा। पिशाच का रूप धारण कर द्वेशीदेव पराजित होने से देवों ने तीसरा नाम महावीर रखा।
चन्द्रप्रभू महिला मण्डल अध्यक्ष, जिला प्रमुख उर्मिला जैन भाया, प्रमिला मूथा, पूजा गर्ग, आयुषी वेद ने बताया कि सोमवार की स्नात्र पूजा प्रमोद मारू, प्रभा मारू, राहुल मारू, खुशबू मारू परिवार की तरफ से सम्पन्न हुई, भोजन ललित श्रीमाल, चेतना श्रीमाल, पीयूष कुमार श्रीमाल, आकांक्षा श्रीमाल परिवार की तरफ से रहा। भक्ति कार्यक्रम लाभार्थी विवेक-नेहा बोरडिया, विनय-हेतल बोरडिया के आवास पर आयोजित हुआ जहां पर राजेश जी पुजारी द्वारा भक्ति कार्यक्रम सम्पन्न करवाए गए। सकल श्रीसंघ आनन्दमय प्रफुल्लित मन से भक्तिरस में सरोबार रहा। पर्यूषण पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में नवयुवक मण्डल, महिला मण्डल सहित सकल श्रीसंघ उपस्थित थे।
Author: Third Eye News 24
सत्यमेव जयते




