जिला प्रशासन करे अखाड़ा संचालकों से वार्ता,वैश्य महासम्मेलन
बारां। हाडोती के ख्यात नाम ऐतिहासिक डोल मेले में अब एक पखवाड़े का भी समय नही रहा नगर परिषद में डोल में लेकर तैयारी के लिए अपने प्रयास शुरू कर दिया हैं। आगामी 3 सितंबर को मुख्य आयोजन जलझूलनी ग्यारस के अवसर पर डोल शोभायात्रा जलवा पूजन का कार्य सरोवर तट पर सम्पन कराया जाता हैं। शास्त्र परंपरा के अनुसार योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म पक्ष 18 दिन बाद जलवा पूजन का कार्य विधि विधान व सूर्य की साक्षी में होता है काफी लंबे समय से कुछ अवसरों को छोड़कर हमेशा जलवा पूजन सूर्य अस्त के बाद होने से पर्व की धार्मिक परंपरा का महत्व दिखाई नहीं देता।
अंतराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के जिला अध्यक्ष ललित मोहन खंडेलवाल, महामंत्री सुरेश गोयल, युवा अध्यक्ष भानु कुमार जैन, महामंत्री आनंद कुमार बंसल, महिला अध्यक्ष नीतू गुप्ता, प्रदेश उपाध्यक्ष यशभानू कुमार जैन, प्रदेश मंत्री कमलेश विजयवर्गीय, सहित देवकीनंदन बंसल, विमल कुमार बंसल, मनीष कुमार लश्करी, अशोक कुमार बंसल, नरेश खंडेलवाल, प्रेमनारायण सोनी, अश्वनी कुमार बंसल, पियूष गर्ग, सहित कई समाजों के अध्यक्षों ने जिला प्रशासन से आग्रह किया हैं।ऐतिहासिक पर्व के अवसर पर श्रीकृष्ण की माता यशोदा का जलवा पूजन कार्यक्रम शास्त्र सम्मत सूर्य की साक्षी में ही कराया जाना उचित रहता हैं। पांच दर्जन से अधिक देव विमान काफी लंबी दूरी तय कर शोभायात्रा के साथ सरोवर तट पर पहुंचते हैं। सब से अंत में श्री कल्याण राय जी व श्री रघुनाथ जी के विमान का चौमुखा बाजार में देवमिलन के बाद यह सभी विशाल विमान सैकड़ो कंधों पर सरोवर तट पर पहुंचते हैं।
जहां सभी विमान की देव आरती और जलवा पूजन की रस्म पूरी की होती है लगातार देखा जा रहा है कि जलवा पूजन का कार्य सूर्यास्त के भी काफी देर बाद सम्पन्न हो पाता हैं। विलंब की परेशानी के बाद गत दो वर्ष पूर्व एक समाज द्वारा शोभायात्रा का बहिश्कार कर अलग से देब विमान का जलवा पूजन कराया गया था। वहीं 5 वर्ष पूर्व स्थानीय प्रशासन द्वारा अखाड़े के संचालकों को विश्वास में लेकर आपसी सहमति से जलवा पूजन को सही समय पर करने का प्रयास किया गया था। जो सफल भी रहा था वैश्य समाज के पदाधिकारी सहित अन्य समाज के पदाधिकारी ने जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन से आग्रह करते हुए कहा कि प्रशासन को अखाड़े के संचालकों के साथ बैठक कर ऐसा प्रयास करना चाहिए कि क्या अखाडो का प्रदर्शन भी परंपरा अनुसार बना रहे। देव विमान के देव पूजन में भी विलंब न होकर शास्त्र सम्मत जलवा पूजन की रस्म सूर्य की साक्षी में विधि विधान से संपन्न हो सके।
Author: Third Eye News 24
सत्यमेव जयते




