सूर्यास्त के बाद जलवा पूजन विधिसम्मत नहींः वैश्य महासम्मेलन
बारां। हाडौती का ख्यातनाम लोक पर्व डोल मेला जो कि एकादशी के दिन जिला मुख्यालय पर सदियों से अनवरत लगता आ रहा है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद माता यशोदा के जलवा पूजन की रस्म इस दौरान 60 से अधिक देव विमानों की उपस्थिति में सूर्यदेव की साक्षी के साथ किए जाने का शास्त्रोत उल्लेख है। सनातन धर्म परम्परा में कहीं भी जलवा पूजन का शुभ कार्य सूर्य की साक्ष्य में ही किया जाना निर्धारित किया हुआ हैं। लेकिन जलझूलनी एकादशी के कारण लगातार कुछ वर्षो को छोडकर देखा जा रहा है कि भगवान श्रीकृष्ण की माता यशोदा के जलवा पूजन की रस्म सूर्यास्त के काफी विलम्ब से सम्पन्न होती हैं।
जिसे शास्त्र सम्मत नहीं कहा जा सकता। गत 10 वर्ष में 2 या 3 वर्ष ही ऐसे रहे कि जलवा पूजन सरोवर परिसर पर सूर्यनारायण की साक्षी में सम्पन्न हुआ। जिला प्रशासन व समाज पंचायतों के प्रधान भी हमेशा इस बात को कहते रहे है कि जलवा पूजन की रस्म सही समय पर होनी चाहिए। इसके लिए प्रशासन कवायद भी करता है। इसके बावजूद विलंब के कारण सबसे अंत में शहर के आराध्य श्रीकल्याण रायजी का देव विमान तालाब की पाल पर पहुंचता है। जिसके दर्शनों के लिए हजारों लोग सड़कों पर जमा रहते हैं। जो सबके बाद विमान के दर्शन कर पाते हैं। अन्य कई कारण ऐसे भी होते हैं कि प्रशासन व समाज प्रमुखों की इच्छा के बावजूद रस्म अदायगी समय पर नही हो पाती है। जिससे धार्मिक परम्परा का पूरी तरह निर्वहन नहीं हो पाता है।
लोगों ने सुझाव है कि इस वर्ष बेहतर कानून व्यवस्था के साथ जलवा पूजन की परंपरा को अनुसार सूर्य की उपस्थिति में ही करवाने का प्रयास होना चाहिए। प्रशासन इसके लिए सभी अखाड़े प्रमुखों व शोभायात्रा मार्ग के प्रमुख व्यापारियों का सहयोग ले। वैष्य महासम्मेलन के जिलाध्यक्ष ललितमोहन खण्डेलवाल, युवा जिलाध्यक्ष भानू कुमार पोरवाल, महिला अध्यक्ष नीतू गुप्ता, प्रदेश उपाध्यक्ष यशभानु कुमार जैन, प्रदेश मंत्री कमलेश विजयवर्गीय सहित कई समाजों के प्रमुखों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रशासन ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करें कि शोभयात्रा भी पूरे वैभव के साथ परम्परानुसार निकाली जावे। लेकिन जलवा पूजन सूर्य की साक्षी में ही सम्पन्न हो। ताकि धार्मिक परम्परा का शास्त्रानुसार निर्वहन किया जा सके। डोल एकादशी पर्व के अवसर पर पूर्व में शराब व मांस के विक्रय पर पूरी तरह पाबन्दी रहती थी। लेकिन कुछ वर्षो से देखा जा रहा है कि इस दिवस पर शराब व मांस के विक्रय पर कोई प्रतिबंध नहीं होता है।
Author: Third Eye News 24
सत्यमेव जयते




