भावना पाषाण को भी भगवान बना देती हैः मीणा
बारां। अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा गोस्वामी तुलसी दास व मुंशी प्रेमचंद की जयंती के उपलक्ष्य में विचार एवं व काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। कवि नाथूलाल निर्भय की सरस्वती वंदना से आरंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे। परिषद् के संरक्षक मंडल के पदाधिकारी वरिष्ठ कवि व शिक्षाविद् प्रह्लाद कुमार मीणा ने उद्बोधन में कहा कि भावना पाषाण को भी भगवान बना देती हैं। तुलसी ने लोक-कल्याणकारी काव्य रचकर भारतीय संस्कृति का उत्थान भी किया है।

उनका काव्य मनुष्य को हर परिस्थिति में जीने की प्रेरणा देता है। हृदय में यदि ईश्वर नहीं है तो उसे कहीं भी खोजें, वो नहीं मिलता और हृदय में यदि ईश्वर हैं। तो वो पाषाण में भी नजर आ जाता है। मुख्यातिथि पूर्व शिक्षाधिकारी सीताराम मीणा ने कहा कि तुलसी लोकनायक के साथ लोक उन्नायक भी हैं। समाज कभी भी उनसे उऋण नहीं हो सकता। रामचरितमानस में राजनैतिक, पारिवारिक,सामाजिक सभी प्रकार के आदर्श देखने को मिलते हैं। सामाजिक समरसता का पर्याय है – रामचरितमानस। विशिष्ट अतिथि आचार्य ओमप्रकाश शास्त्री ने मुंशी प्रेमचन्द और तुलसीदास के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला। काव्यपाठ करते हुए हिन्दी साहित्य भारती के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश सोनी ने कहा कि आज यदि हमारी भारतीय संस्कृति बची हुई है तो उसका श्रेय तुलसीदास को जाता है।

उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद ने तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियों का यथार्थ वर्णन कर सामाजिक विद्रूपताओं को दूर करने की एक आदर्श कोशिश की है। प्रदेश उपाध्यक्ष प्रद्युम्न वर्मा ने तुलसी के मानस में हर समस्याओं का समाधान बताया । परिषद् की परम्परा अनुसार सभी ने कलश पूजन कर साहित्य सेवा हेतु समर्पण भाव से धनराशि प्रदान की।संचालन इकाई अध्यक्ष बच्छराज राजस्थानी ने किया। काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवि हरि अग्रवाल, शोभागमल वैष्णव, हरीशचन्द सेन, ब्रजराज प्रजापति, सुरेश चक्रधारी आदि ने कार्यक्रम आधारित काव्यपाठ किया।
Author: Third Eye News 24
सत्यमेव जयते




