बारां । अनुष्ठान कोकिल सत्संग समिति खाकी बाबा की बगींची में आयोजित श्रद्धाञ्जलि सभा में काठिया बाबा आश्रम बागं के संत आचार्य परमानन्द ने कहा कि संतशिरोमणि श्रीराम बाबा कोकिल महाराज, जो राष्ट्रीय कथा मर्मज्ञ, धर्म संस्कृति के वाहक, श्रेष्ठ मार्गदर्शक के रूप में जाने जाते थे, अब हमारे बीच नहीं रहे। यह सत्य हृदय की अनंत गहराइयों तक वेदना पहुंचा रहा हैं। क्योंकि जिनके सान्निध्य में हमने धर्म, प्रेम सत्य का पाठ सीखा, उनका भौतिक रूप से अनुपस्थित होना एक असहनीय पीड़ा है। मृत्यु एक परम सत्य है, जिसे स्वीकारना ही विधि का विधान है। हम जानते हैं कि शरीर नश्वर हैं। आत्मा अमर। कोकिल बाबा का शरीर भले ही आज हमारे सामने न हो, लेकिन उनकी शिक्षाएं, उनके आदर्श, उनके प्रेम की ऊर्जा सदा हमारे साथ रहेगी। वे केवल एक संत नहीं थे, वे एक चलती-फिरती पाठशाला थे। उनकी वाणी में ऐसी शक्ति थी जो हृदय को छू लेती थी, उनका सान्निध्य मात्र ही मन को शांति प्रदान करता था।
बाबा का विराट व्यक्तित्व
वे राष्ट्रीय कथा मर्मज्ञ थे, जिन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी से धर्म ग्रंथों के गूढ़ रहस्यों को सरल शब्दों में जन-जन तक पहुंचाया। उनकी कथाएं केवल मनोरंजन का साधन नहीं थीं, बल्कि वे जीवन जीने की कला सिखाती थीं। उन्होंने धर्म और संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। वे केवल उपदेश नहीं देते थे, वे अपने जीवन में उन आदर्शों को जीते थे जिन्हें वे दूसरों को सिखाते थे। वे एक श्रेष्ठ मार्गदर्शक थे। जब भी कोई असमंजस में होता, उनकी शरण में आता, तो उन्हें बाबा से न केवल समाधान मिलता, बल्कि एक नई दिशा भी मिलती। उनके मार्गदर्शन में अनेकों ने अपने जीवन को सही राह पर लाया, आध्यात्मिक उन्नति के पथ पर अग्रसर हुए। उनका जीवन स्वयं एक प्रेरणा था दृ त्याग, तपस्या, प्रेम और सेवा का जीवंत उदाहरण था
वेदना व प्रेरणा का संगम
आज हम जिस वेदना से गुजर रहे हैं, वह स्वाभाविक है। एक ऐसे महापुरुष का चले जाना जिसने हमारे जीवन को छुआ, हमें राह दिखाई, हमें प्रेम करना सिखाया, उस दर्द को शब्दों में बयां करना कठिन है। उनकी मुस्कान, उनकी आँखें, उनकी वाणी सब कुछ हमारी स्मृतियों में हमेशा जीवंत रहेगा। लेकिन, इस वेदना के साथ-साथ, हमें उनसे मिली प्रेरणा को भी याद रखना होगा। बाबा ने हमें सिखाया कि जीवन का अंतिम लक्ष्य केवल भौतिक सुख नहीं, बल्कि आत्मिक शांति परमात्मा से जुड़ाव है। उन्होंने हमें प्रेम, करुणा सेवा का महत्व समझाया उन्होंने हमें बताया कि सच्ची खुशी दूसरों की सेवा करने धर्म के मार्ग पर चलने में निहित है।
हमें उनके दिखाए मार्ग पर चलना होगा, उनकी शिक्षाओं को आत्मसात करना होगा, धर्म व संस्कृति के मूल्यों को आगे बढ़ाना होगा। यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। सभा में गुरुदेव कोकिल बाबा के सिसयें रामेश्वर गौत्तम, कोकिल सत्संग समिति के राष्ट्रीय सचिव नरेश गोयल, योगेश गुप्ता (पैंतरा) भंवर लाल शर्मा, पंकज शर्मा, पत्रकार राधेश्याम शर्मा, धर्मेन्द्र कुमार ने गुरुदेव के चित्रों को आकर्षक झांकी पर पुष्पाहार पहनायें। सभा में रामेश्वर गौत्तम ने गुरुदेव कोकिल बाबा के जीवन पर संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुये कहा कि वे नियमित दिनचर्या पाठ पूजन में विश्वास करते थे। बारां शहर स्वयं गुरुदेव के सानिध्य में आश्विन नवरात्रा के अवसर पर पांच अनुष्ठान का साक्षी रहा बारां विलक्षण प्रभाव के कारण आज भी रोमांचित कर देता है। गुरुदेव कोकिल बाबा नवरात्रा अनुष्ठान सफलतापूर्वक कराने वाले बाबा के रूप में संत समाज में विख्यात थे।
16 वां कार्यक्रम 3 जून को
संत कोकिल बाबा का कार्यक्रम 3 जून को वृन्दावन धाम के पोखला आश्रम पर रखा गया है। जहां 1100 विद्वान बाह्मणों, संत महात्माओं आगन्तुक शिष्य परिवारों का भंडारा होगा।
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Author: Third Eye News 24
सत्यमेव जयते




