मंत्रिमंडलीय समिति ने समीक्षा बैठक में किया निर्णय
बारां । प्रदेश में न्यून नामांकन के कारण महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलें बंद तो नहीं होगी, लेकिन अब बच्चों को यहां अंग्रेजी के साथ हिंदी माध्यम का विकल्प भी मिलेगा। गत सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों में हिंदी माध्यम की स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित कर दिया। हालांकि बच्चों को अंग्रेजी समझ में नहीं आने की समस्या आई। अब बच्चों के सामने अपने गांव की स्कूल में हिंदी माध्यम में पढ़ने का विकल्प भी होगा। यह निर्णय राज्य सरकार द्वारा महात्मा गांधी स्कूलों की समीक्षा के लिए गठित मंत्रिमंडलीय कमेटी ने लिया है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा, भाषा एवं पुस्तकालय, पंचायतीराज विभाग प्रारंभिक शिक्षा के शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने आदेश जारी किए हैं। गत कांग्रेस शासन में ऐसी जगह भी महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलें खोल दी, जहां 15-20 बच्चों का ही नामांकन था। कई जगह पर्याप्त भवन भी नहीं थे। इसे लेकर गत सत्र में सरकार ने ऐसी स्कूलें बंद करने का निर्णय लिया। बाद में इसकी समीक्षा करने उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा की देखरेख में चार मंत्रियों की कमेटी गठित की थी।
शिक्षक नहीं तो पड़ोस स्कूल से लेंगे, अतिरिक्त मानदेय भी
अगर हिंदी माध्यम पढ़ाने के लिए किसी स्कूल में विषयाध्यापक नहीं है तो नजदीकी स्कूल से सब्जेक्ट टीचर लगाने होंगे। संबंधित शिक्षक को अपनी मूल स्कूल में भी अध्यापन करवाना होगा। विभाग के सामने यह विकल्प भी होगा कि जिस शिक्षक को वो दो स्कूलों में पढ़ाने के लिए लगा रहा है। उसको अतिरिक्त मानदेय भी दे सकेंगे।
जनप्रतिनिधि सिर्फ अनुशंसा करेंगे, निर्णय कमेटी करेगी
हिंदी या अंग्रेजी स्कूलों को बंद करने, नई स्कूल खोलने या क्रमोन्नत के मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधि अनुशंसा कर सकते हैं। लेकिन निर्णय उच्चस्तरीय कमेटी ही करेगी। इसमें पक्ष व विपक्ष के जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। विपक्षी जनप्रतिनिधि ने आपत्ति उठाई तो संबंधित स्कूल क्रमोन्नत बंद भी हो सकता है। अब राज्य स्तरीय समीक्षा समिति बनेगी। जिसमें पक्ष, विपक्ष के जनप्रतिनिधि, अभिभावक एवं संबंधित विभागीय अधिकारी शामिल होंगे।
टॉपिक एक्सपर्ट
शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेश उपाध्यक्ष गजराज सिंह मोठपुर का कहना हैं। कि महात्मा गाँधी स्कूलों में अब इंग्लिश मीडियम के साथ हिन्दी मीडियम में शिक्षण करवाने का निर्णय सरकार का सराहनीय एवं स्वागत योग्य कदम है। स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुये इन स्कूलों को क्रमोंन्नत या बंद करने की अनुशंसा करने का अधिकार भी सरकार द्वारा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को देना लोकतान्त्रिक कदम है। राज्य स्तरीय समिति में पक्ष, विपक्ष, अभिभावक एवं समन्धित अधिकारियों की भागीदारी से निष्पक्ष निणर्य हो सकेंगे जिसका सीधा फायदा छात्रों को होगा।
गीरो को अपने हाथों से ठंडा जल पिलाया। ठंडा जल पीकर राहगीरों ने खुशी व्यक्त कर क्लब की प्रशंसा की।
Author: Third Eye News 24
सत्यमेव जयते




