बारां। शाहबाद जंगल के लाखों पेड़ों को अब राजस्थान हाइकोर्ट जोधपुर की बिना अनुमति के किसी भी हाल में नहीं काटा जा सकता। हाल ही 28 अप्रैल को मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव व विद्वान न्यायाधीश सुनील बेनिवाल ने अपने फैसले में केन्द्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह व्यापक जनहित और 1 लाख 19 हजार 759 पेड़ों के अस्तित्व का प्रश्न है। इन पेड़ों की कटाई से पर्यावरणीय संतुलन और वन्य जीव आवास प्रभावित होगा। अतः केन्द्र सरकार 2 माह के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट कर न्यायालय को अवगत कराए। उसके बाद कोर्ट की अनुमति से ही पेड़ काटे जा सकते हैं।
शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन के सदस्यो, अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और अन्य पर्यावरण प्रेमियों के साथ ही आम जनता को राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर के इस फैसले से बहुत बड़ी राहत मिली है। शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति बारां के संरक्षक प्रशांत पाटनी कुन्जेड और बृजेश विजयवर्गीय ने कहा कि हाइकोर्ट ने अपने फैसले से सभी पर्यावरण प्रेमियों और आम जनता को बहुत बड़ी राहत प्रदान की है। हम सभी इस फैसले से उत्साहित हैं और आम जनता की भावना को समझने से जुड़े न्याय पालिका के इस फैसले का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई व्यक्तिगत संघर्ष और आंदोलन नहीं है बल्कि यह पूरे विश्व के मानव समुदाय, भारतवर्ष, राजस्थान राज्य के पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा हुआ मामला हैं। जिसमें सभी लोग तन मन और धन से सहयोग कर रहे हैं। केन्द्र और राज्य सरकार से हमारा अनुरोध है कि इस क्षैत्र का विकास ही करना हैं। तो इस परियोजना को अन्यत्र ऐसी जगह स्थानांतरित करे जहां इसके लगने पर जंगल की कटाई नहीं होती हो अन्यथा हमारा यह आंदोलन अहिंसा पूर्वक इसी तरह से चलता रहेगा।
Author: Third Eye News 24
सत्यमेव जयते




