नारी शिक्षा के अग्रदूत थे महात्मा ज्योतिबा फूलेः आचार्य परमानंद
बारा। भारतीय इतिहास संकलन समिति बारां के द्वारा महात्मा ज्योतिबा फूले की जन्म जयंती पर विचार संगोष्ठी का आयोजन कोटा रोड स्थित विवेकानंद पार्क में किया गया। इस अवसर पर काठिया बाबा आश्रम के आचार्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे मुख्य वक्ता आचार्य परमानंद गुरुजी ने कहा कि वैदिक काल में महिलाओं को उत्कृष्ट स्थान प्राप्त था महिलाएं जीवन के हर क्षेत्र में पुरुषों के समान प्रतिष्ठित थी। महिलाएं माताये बहिने, पुत्री पत्नियां अपने अपने कर्तव्य को भली-भांति निभाती थी। वहीं पुरुषों के जीवन में महिलाओं का बहुत अधिक महत्व था। वैदिक समाज में पत्नी के बिना यज्ञ भी अपूर्ण माना जाता था महिला पुरुष की सहयोगिनी तथा सहधर्मिणी होती थी और इसी कारण महिला को अर्धांगिनी भी कहा गया है। उन्होंने कहा कि बीच के कालखंड में महिलाओं की स्थिति कमजोर होती गई महिलाओं के उत्थान की दिशा में अनेक महापुरुषों ने योगदान दिया। उनमें से एक समाज प्रबोधक, विचारक, लेखक, दार्शनिक क्रान्तिकारी महात्मा ज्योतिबा फूले थे।
इतिहास संकलन समिति अध्यक्ष डॉ. सुरेश मेघवाल ने कहा कि मध्यकाल में बाहरी आक्रमणकारी मुगलों, मुसलमान ने भारत पर अपना आधिपत्य कायम कर लिया इस काल में नारी की दासता शुरू हुई। आचार्य परमानंद ने कहा कि पर्दा प्रथा ने नारी को घर की चार दिवारी में कैद रखने के लिए मजबूर कर दिया। बाल विवाह का बाहुल्य हो गया तथा शिक्षा के द्वारा उसके लिए लगभग बंद कर दिए गए। इसके साथ-साथ सती प्रथा भी अपने सर्वोच्च शिखर पर पहुंच गई थी। यह भारतीय नारी का दुर्भाग्य था भारतीय समाज में नारी के उत्थान के लिए महात्मा ज्योतिबा फूले ने उन्हें शिक्षित करने के क्षेत्र में काम करने का संकल्प लिया उनका मानना था कि जब तक समाज की स्त्रियां शिक्षित नहीं होगी तब तक शिक्षित और सुसंस्कृत समाज की कल्पना करना व्यर्थ है। छात्रा इतिहासकार प्रिसी सिंह ने बताया कि महात्मा ज्योतिबा फूले द्वारा प्रथम कन्या पाठशाला खोली।
जिसकी पहले दिन की पहली घंटी ने भारत में नारी मुक्ति आंदोलन का शंखनाद कर दिया। कॉलेज इकाई छात्रा इतिहासकार प्रिया मीणा ने कहा कि किसी भी देश के विकास के लिए उस देश की महिलाओं का शिक्षित होना अति आवश्यक है। संगोष्ठी में छात्रा इतिहासकार रचना कुमारी, कविता मीणा, बिंदिया, शिवानी बैरवा, किरण बैरवा, ऐश्वर्या शर्मा ने भी विचार रखे। सभी ने महात्मा ज्योतिबा फूले के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने ज्ञान का दीप जलाकर सबका ज्ञान दीप जलाने का संकल्प लिया। महिला संपर्क प्रमुख यशोदा मेघवाल ने सबका मुंह मीठा कराया। संगोष्ठी के पश्चात ज्योतिबा फूले की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर जयंती धूमधाम से मनाई।
Author: Third Eye News 24
सत्यमेव जयते




