बारां 20 सितम्बर। न्यायालय विशिष्ठ न्यायाधीश लैंगिग अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 तथा बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 संख्या-1 के पीठासीन अधिकारी एवं जिला न्यायाधीश संवर्ग हनुमान प्रसाद ने शुक्रवार को नाबालिग छात्रा का व्यपहरण व ज्यादती करने के एक वर्ष पुराने मामले का निस्तारण करते हुए एक आरोपी को आजीवन के कठोर कारावास एवं एक लाख 5 हजार रूपए के अर्थदंड से दंडित किया है।
विशिष्ट लोक अभियोजक पोक्सो क्रम नं. 1 घासीलाल वर्मा ने बताया कि 15 सितम्बर 2023 को पीड़िता ने पिता के साथ अंता पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें उल्लेख किया गया था कि पीड़िता कक्षा 10वीं में पढ़ती है। वह लगभग 14 वर्ष की है। वह घर से हमेशा कोचिंग पढ़ने पास के गांव जाती है। रिपोर्ट दर्ज कराई उस दिन भी वह दोपहर 3 बजे कोचिंग जाने के लिए घर से निकली थी। रास्ते में कन्हैयालाल की चक्की के पास पहुंची तो पीड़िता को विक्रम ऐरवाल निवासी भैरूपाड़ा व उसका दोस्त चंद्र प्रकाश मोटरसाइकिल लेकर आए। पीड़िता आरोपी विक्रम को एक साल से जानती है। विक्रम ने पीड़िता को अपने साथ चलने को कहा, तो पीड़िता ने पहले तो मना कर दिया। लेकिन बाद में आरोपी द्वारा कसम दिलाने पर वह साथ जाने को सहमत हो गईं। विक्रम व उसका दोस्त चंद्रप्रकाश पीड़िता को मोटरसाइकिल से श्रीराम नगर ले गए। जहां आरोपी के कमरे पर उसका एक ओर दोस्त था। जिन्होंने विक्रम से कहा कि वे दोनों बाहर खड़े हो गए और कहा कि तुम तुम्हारा काम करो, हम ध्यान रखेंगे। इसके बाद विक्रम ने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और पीड़िता के साथ जबरदस्ती करने लगा। उसने मना किया, लेकिन विक्रम ने उसके उसके साथ जबरन ज्यादती की। साथ ही विक्रम ने किसी को नहीं बताने की पीड़िता को धमकी दी। फिर विक्रम व चंद्रप्रकाश पीड़िता को मोटरसाइकिल से कोचिंग पर छोड़कर चले गए। जहां से घर आने पर पीड़िता ने सारी बात उसके माता-पिता को बता दी।
इस पर पुलिस ने पोक्सो एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में आरोपी विक्रम व चंद्रप्रकाश उर्फ चंद्र के खिलाफ मामला दर्ज कर अनुसंधान किया। जिसमें आरोप सही होने पर कोर्ट में आरोपी विक्रम के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। जहां जिला न्यायाधीश हनुमान प्रसाद ने आरोप सिद्ध होने पर आरोपी विक्रम 20 वर्ष पुत्र हेमराज निवासी भैरूपाड़ा थाना अंता को धारा 363, 376;3द्ध व 3/4;2द्ध/6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत 20 वर्ष का आजीवन कारावास एवं एक लाख 5 हजार रूपए के अर्थदंड से दंडित किया है। इसमें 3 वर्ष का कठोर कारावास भी शामिल है।
अदम अदायगी अर्थदंड पर एक वर्ष का साधारण कारावास अलग से भुगतेगा। सभी मूल सजाएं साथ-साथ चलेंगी। वहीं इसम मामले में आरोपी द्वारा पुलिस एवं न्यायिक अभिरक्षा में व्यतीत की गई अवधि को नियमानुसार समायोजित किया कर दिया जाएगा।
न्यायालय द्वारा पीड़िता के साथ घटित अपराध की प्रकृति के लिए उस पर पड़ने वाले शारीरिक, मानसिक दुष्प्रभाव एवं आयु व अवस्था को देखते हुए उसे 4 लाख रूपए दिलाए जाने की अनुशंषा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को गई है। जिसमें दो-दो लाख की एफडी क्रमशः 3 व 5 वर्ष के लिए राष्ट्रीयकृत बैंक में संरक्षक पिता के नाम कराई जाएगी। जो पीड़िता के बालिग होने पर अदा की जाए।
Author: Third Eye News 24
सत्यमेव जयते




