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श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव : भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का रसपूर्ण वर्णन

बारां। शहर के शाहाबाद रोड स्थित कलश वाटिका, नर्सिया जी जैन मंदिर परिसर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में कथा वाचक श्रीधाम वृंदावन के प्रख्यात कथा वाचक कृष्ण मोहन जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक बाल-लीलाओं का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्ति-रस से सराबोर कर दिया। कथा पांडाल में भारी संख्या में भक्त मौजूद रहे। हर कथा प्रसंग पर “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोश गूंजते रहे और पूरा वातावरण आध्यात्मिक आनंद से भर गया। महाराजश्री ने कथा की शुरुआत गर्गाचार्य द्वारा नंदबाबा के घर जाकर बालक का नामकरण करने के प्रसंग से की।

उन्होंने बताया कि ऋषि गर्ग ने बालक का नाम “कृष्ण” रखा। उन्होंने श्रद्धालुओं को समझाया कि भगवान के प्रत्येक नाम के पीछे उनकी किसी न किसी लीला का रहस्य छिपा है। जब-जब प्रभु नई लीलाएं करते हैं। तब-तब भक्त उन्हें नए नाम से पुकारने लगते हैं। इसके बाद पूतना वध की कथा सुनाते हुए महाराज जी ने स्पष्ट किया कि पूतना वासना और अविद्या का प्रतीक है। ईश्वर के समक्ष न तो वासना टिकती है और न ही पाखंड। जैसे पूतना रूपी अविद्या का अंत हुआ। वैसे ही जब कोई साधक सच्चे मन से भक्ति करता हैं। तो उसके जीवन से भी अज्ञान और पाखंड का अंधकार दूर हो जाता है। इसके आगे महाराजश्री ने माखन चोरी की लीला सुनाते हुए कहा कि माखन वास्तव में भक्त के हृदय की निर्मलता का प्रतीक है। जब भगवान माखन चुराते हैं तो इसका अर्थ यह है कि वे भक्त के हृदय की पवित्रता को स्वीकार करते हैं। इसी क्रम में उन्होंने कालिया नाग दमन की कथा सुनाई और समझाया कि कालिया नाग इंद्रियों की वासनाओं और प्रदूषण का प्रतीक हैं।

जबकि यमुना नदी भक्ति की निर्मल धारा का जब भक्ति में आसक्ति और प्रदूषण प्रवेश कर जाते हैं। तब स्वयं भगवान प्रकट होकर उस अंधकार और अशुद्धि का नाश कर शुद्ध भक्ति को प्रवाहित करते हैं। महाराज जी ने अखन बंधन प्रसंग का भी वर्णन किया और बताया कि जब भक्त सच्चे भाव से भगवान को बांधने का प्रयास करता है। तो प्रभु अपने भक्त के प्रेम में स्वयं बंध जाते हैं। उन्होंने चीर हरण की कथा सुनाते हुए कहा कि संकट की घड़ी में जब भक्त शरणागत भाव से भगवान को पुकारता हैं। तो वे तुरंत उसकी लाज बचाने के लिए उपस्थित हो जाते हैं। इन लीलाओं के वर्णन के बीच बार-बार पंडाल में तालियां गूंज उठतीं और श्रद्धालु भक्ति-भाव से अभिभूत हो उठते। कथा में गोवर्धन पूजा का आयोजन भी बड़े उत्साह से हुआ। श्रद्धालुओं ने सामूहिक मानसिक परिक्रमा की, अभिषेक पूजन किया और भगवान को छप्पन भोग अर्पित किए।

इस अवसर पर भक्ति और उत्साह का ऐसा संगम देखने को मिला जिसमें हर भक्त आनंद और उल्लास से झूमता नजर आया।पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु नृत्य और भजन-कीर्तन में ऐसे तल्लीन हो गए मानो स्वयं वृंदावन की गलियों में भगवान की लीलाओं का प्रत्यक्ष साक्षात्कार कर रहे हों। महाराजश्री ने घोषणा की कि मंगलवार को कथा में गोपियों का विरह, उद्धव को श्रीकृष्ण के दर्शन, अभिमान के प्रतीक कंस वध और अन्य रोचक प्रसंगों का वर्णन होगा। कथा पंडाल में दिनभर भजनों की गूंज, महाराजश्री की मधुर वाणी और भक्तों की उमंगपूर्ण उपस्थिति ने वातावरण को अद्भुत बना दिया।

Third Eye News 24
Author: Third Eye News 24

सत्यमेव जयते

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