बारां। राजकीय सार्वजनिक जिला पुस्तकालय बारां में गुरुवार को उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद एवं महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती समाज सेवी अजय दायमा के आतिथ्य में मनाई गई। इस अवसर पर एमसीए विद्यार्थी लोकेश सुमन ने कहा कि ‘शब्दों की शक्ति क्या होती है यह गोस्वामी तुलसीदास और मुंशी प्रेमचंद की लेखनी को पढ़कर जाना जा सकता है। एक ओर वे संत थे जिन्होंने रामचरित्र मानस में भक्ति की कविता रुपी महामंत्र बना दिया और जिसकी हर पंक्ति में ईश्वर का स्पर्श कराया। दूसरी ओर वो यथार्थवादी लेखक थे जिन्होंने कलम से समाज को आईना दिखाया।
और इंसान के भीतर के हर दर्द को कागज पर उतार दिया। मुख्य वक्ता रामेश्वर गौतम ने कहा कि भक्ति केवल पूजा नहीं जीवन का मार्ग हैं और गोस्वामी तुलसीदास जी का अमर ग्रन्थ रामचरित्र मानस जीवन जीने की कला सिखाता है। परामर्शदाता हरीश नागर ने कहा कि प्रेम चंद जी का साहित्य केवल कल्पना नहीं, वह समाज का संघर्ष हैं। इनकी कलम सिर्फ लिखती नहीं थी, वो चेतना को जगाती थी, आत्मा को छूती थी और विचारों में क्रांति लाती थी। कार्यक्रम की शुरूआत में पुस्तकालय अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद मीणा ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प हार पहनाया। पाठक मुकेश मीणा, जयंत ऐरवाल, राजेन्द्र गहलोत ने विचार व्यक्त किए। हरीश नागर ने आभार व्यक्त किया।
Author: Third Eye News 24
सत्यमेव जयते




