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भारत अमेरिका कृषि व्यापार कार्य पत्र वापस लेने का भा. किसान संघ ने किया स्वागत

बारां। भारत सरकार को नीतिगत विषयों पर सुझाव देने वाली भारत की अग्रणी संस्था नीति आयोग ने भारत अमेरिका के बीच व्यापार पर एक कार्य पत्र जारी किया था। जिसे ’नई अमेरिकी व्यापार व्यवस्था में भारत-अमेरिका कृषि व्यापार को बढ़ावा देना’ नाम दिया था। भारतीय किसान संघ के विरोध को कई किसान संगठनों से मिले समर्थन के चलते इसे नीति आयोग ने अब अपनी वेबसाइट से हटा लिया है।

देश के सबसे बड़े किसान संगठन भारतीय किसान संघ ने 14 जून को लिखित तौर पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर कर इसका विरोध किया था। इस पत्र में अमेरिका से जीएम सोयाबीन तेल, जीएम सोयाबीन बीज और जीएम मक्का सहित अन्य डेयरी प्रोडक्ट को आयात करने के सुझाव दिए थे। पत्र में सोयाबीन तेल के आयात पर अमेरिका को टैरिफ में रियायतें देने की वकालत भी की गई थी। जबकि जीएम फसलों के दुष्प्रभाव व लाभ को लेकर जारी शोधों की रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
किसानों व उपभोक्ता चूहा ना समझे नीति आयोग
भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मोहनी मोहन मिश्र ने कड़े शब्दों में कहा कि सिफारिश करने वाले नीति आयोग के लोग पहले अपने ऊपर लंबे समय जीएम फसल का प्रयोग करें परिणाम जांचें। नीति आयोग किसानों व उपभोक्ता को चूहा ना समझे। पूर्व में भी हरित क्रांति के नाम पर अधिक उत्पादन की चाहत में किसानों को रासायनिक खेती करने के लिए रसायन परोसा गया। अब इन्हीं रसायनों से कैंसर होने पर दोष किसान पर मढ़ा जा रहा है।
70 करोड़ किसानों की आजीविका पर खतरा टला
बीकेएस के महासचिव मोहिनी मोहन मिश्र ने कहा, कि‘ अमेरिकी दबाव में भारतीय कृषि को जीएम उत्पादों के लिए खोलने से कृषि पर निर्भर लगभग 70 करोड़ भारतीय लोगों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है। अमेरिका जैसे देशों में किसानों को भारी सब्सिडी दी जाती है। उत्पादन लागत कम है। ऐसे में भारत का किसान उनसे स्पर्धा नहीं कर सकता। नीति आयोग के कार्य पत्र की वापिसी से किसानों पर से अभी यह खतरा टल गया है। किसान संघ ने नीति आयोग के इस निर्णय का स्वागत करते हैं।
किसान संघ ने बताया किसानों की जीत
नीति आयोग के कार्य पत्र पर किसान संघ पदाधिकारियों का कहना था कि नीति आयोग के सुझाव देश और उसके किसानों के हितों के खिलाफ हैं। इसके विरोध में पूरे देश में ज्ञापन भी दिए थे। जिसके बाद नीति आयोग ने भारत अमेरिका कृषि व्यापार नाम के इस कार्य पत्र को देश के किसानों के भारी विरोध के चलते वापिस लेकर वेबसाइट से हटा लिया है। संभाग प्रचार प्रमुख हेमराज यदुवंशी ने बताया कि प्रांत अध्यक्ष शंकरलाल नागर, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य कैलाश गंदोलिया, प्रांत उपाध्यक्ष विक्रमसिंह सिरोहिया, प्रांतीय विपणन प्रमुख घनश्याम मीणा, संभाग मंत्री भूपेंद्र शर्मा, जिलाध्यक्ष अमृत छजावा व मंत्री देवकिशन नागर समेत संभाग उपाध्यक्ष रणवीरसिंह हाड़ा, रामभरोस सुमन आदि ने किसानों की बड़ी जीत होने की बात कही व नीति आयोग के निर्णय का स्वागत किया है।

Third Eye News 24
Author: Third Eye News 24

सत्यमेव जयते

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