शिक्षा निदेशालय ने संस्था प्रधानों व शिक्षकों के मूल्यांकन के नियम किये तय
बारां. । सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए शिक्षा निदेशालय ने प्राचार्यों व शिक्षकों के मूल्यांकन के नए नियम तय कर दिए हैं। यह नियम शैक्षणिक सत्र 2024-25 से लागू होंगे। बोर्ड परीक्षाओं का श्रेष्ठ परिणाम देने पर संस्था प्रधानों शिक्षकों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मान से नवाजा जाएगा। वहीं, परिणाम अपेक्षाकृत कम रहने पर शिक्षक के खिलाफ 17 सीसीए के तहत कारवाई की जाएगी। हालांकि, पहले साल रिजल्ट कम रहा तो लिखित चेतावनी देकर सुधार की हिदायत दी जाएगी। यदि, तीन साल तक परिणाम में सुधार नहीं हुआ तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जिसका असर प्रमोशन, ट्रांसफर सहित अन्य परिलाभ पर पड़ सकता है।
’संस्था प्रधान के लिए वह होंगे मानदंड’
शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेश उपाध्यक्ष गजराज सिंह ने बताया कि निदेशक के आदेशानुसार विद्यालय का कक्षा 10वीं व 12वीं का परीक्षा परिणाम 90 प्रतिशत व उससे अधिक, कक्षा 5वीं व 8वीं में 90 प्रतिशत या इससे अधिक विद्यार्थियों द्वारा ए ग्रेड प्राप्त करने पर संस्था प्रधान को विभाग द्वारा श्रेष्ठ विद्यालय का प्रमाण पत्र दिया जाएगा श्रेष्ठ परिणाम के लिए न्यूनतम 10 विद्यार्थियों का नामांकन होने पर ही विचार किया जाएगा. यदि विद्यालय में किसी भी एक परीक्षा (कक्षा 5, 8, 10 और 12) में परिणाम मानदण्ड से न्यून रहता हैं। तो संस्था प्रधान को प्रमाण पत्र नहीं किया जाएगा।
’न्यूनतम परिणाम पर होगी कार्रवाई’
विद्यालय का कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम 60 प्रतिशत अथवा न्यूनतम एवं 10वीं बोर्ड का परीक्षा परिणाम 50 प्रतिशत उससे न्यूनतम कक्षा 5वीं-हयों के परीक्षा परिणाम में 50 प्रतिशत या अधिक विद्यार्थियों द्वारा ई ग्रेड प्राम करने पर संस्था प्रधान के परीक्षा परिणाम को न्यूनतम माना जाएगा संस्था प्रधान के रूप में गत पांच वर्षों में आलोच्य वर्ष सहित परीक्षा परिणाम एक बार मानदंड से न्यून रहने पर लिखित चेतावनी दी जाएगी स्थान परिवर्तन किया जा सकेगा. आलोच्य वर्ष सहित लगातार दो वर्षों अथवा गत पांच क्यों में से किन्नी 3 वर्ष का परीक्षा परिणाम मानदंड से न्यूनतम रहने पर सीसीए नियम-17 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।
’शिक्षकों के लिए यह होंगे मानदंड’
उपाध्यक्ष गजराज सिंह ने बताया कि शिक्षक का कक्षा 12वीं एवं 10वीं में अध्यापन करवाए गए विषय का बोर्ड परीक्षा परिणाम 90 प्रतिशत अथवा उससे अधिक रहने, कक्षा 5वीं व 8 वीं में अध्यापन करवाए गए विषय का परीक्षा परिणाम 95 प्रतिशत या अधिक विद्यार्थियों द्वारा ए ग्रेड प्राप्त करने पर संबंधित शिक्षक को विभाग द्वारा श्रेष्ठ परिणाम का प्रमाण पत्र दिया जाएगा. श्रेष्ठ परिणाम के लिए न्यूनतम 10 विद्यार्थियों का नामांकन होने पर ही विचार किया जाएगा. यदि विद्यालय में किसी भी एक परीक्षा कक्षा 5, 8, 10 और 12 में परिणाम मानदंड से न्यूनतम रहता हैं। तो शिक्षक को परीक्षा परिणाम के लिए प्रणाम पत्र नहीं दिया जाएगा।
’न्यूनतम परीक्षा परिणाम पर होंगे यह प्रावधान’
इससे प्रकार शिक्षक का कक्षा 12वीं में अध्यापन करवाए गए विषय का बोर्ड परीक्षा परिणाम 70 प्रतिशत अथवा न्यूनतम, कक्षा 10वीं में अध्यापन करवाए गए विषय का बोर्ड परिणाम 60 प्रतिशत अभया न्यूनतम कथा 5 वीं एवं कक्षा हवों में अध्यापक (लेवल-प्रथम अथवा लेवल-द्वितीय जो निर्धारित हो) के कक्षा/विषय के परीक्षा परिणाम में 40 प्रतिशत अथवा अधिक विद्यार्थियों द्वारा ई ग्रेड प्राप्त करने पर संबंधित शिक्षक के परीक्षा परिणाम को न्यूनतम माना जाएगा। शिक्षक के रूप में गत पांच वर्षों (आलोच्य वर्ष सहित) में परीक्षा परिणाम एक बार मानदंड से न्यूनतम रहने पर लिखित चेतावनी दी जाएगी तथा स्थान परिवर्तन किया जा सकेगा. आलोच्य वर्ष सहित लगातार दो वर्षों अथवा गत पांच में से कोई 3 वर्ष का परीक्षा परिणाम मानदंड से न्यूनतम रहने पर सीसीए नियम-17 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।
’टॉपिक एक्सपर्टः-’
’शिक्षा की गुणवत्ता में होगा सुधार’
शिक्षा विभाग द्वारा उत्कृष्ट परिणाम देने वाले संस्था प्रधानों एवं शिक्षकों को सम्मानित करने का निर्णय स्वागत योग्य एवं सराहनीय है। इससे शिक्षकों की जवाबदारी तय होगी शिक्षण के प्रति उत्साह बड़ेगा,साथ ही शिक्षा में गुणवत्ता भी बढ़ेगी। वहीं, जो शिक्षक लगातार 10 वर्षों से उत्कृष्ट परिणाम दे रहे हैं, सरकार को उन्हें तबादलों में प्राथमिकता देनी चाहिए।
Author: Third Eye News 24
सत्यमेव जयते




