10 दिवसीय निःशुल्क आयुर्वेद शल्य क्षार सूत्र चिकित्सा शिविर में उमड रह़ी भीड़
बारां । आयुर्वेद विभाग एवं नेशनल आयुष मिशन के संयुक्त तत्वावधान में अग्रवाल सेवा सदन में चल रहे 10 दिवसीय निःशुल्क आयुर्वेद शल्य क्षार सूत्र चिकित्सा शिविर में पंचकर्म चिकित्सा आधुनिक जीवनशैली से उपजी बीमारियों के समाधान के रूप में उभरकर सामने आई है। आयुर्वेद विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि पंचकर्म केवल एक प्राचीन पद्धति नहीं, बल्कि शरीर को ’सेलुलर लेवल’ (कोशिकीय स्तर) पर शुद्ध करने का आधुनिक विज्ञान है।
उपनिदेशक डॉ. वीरेंद्र कुमार सोहाया एवं शिविर प्रभारी डॉ. कमलेश कंवरिया ने बताया कि अब तक 4500 से अधिक रोगी शिविर में आयुर्वेद का लाभ ले चुके हैं। क्षार सूत्र से ओपरेशन के लिए 92 रोगियों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। जिनमें से 62 रोगियों का ओपरेशन किया जा चुका है। अब तक पंचकर्म चिकित्सा से 208, अग्नि कर्म विद्ध कर्म से 233, जरा अवस्था से 120, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा से 134 व स्वर्ण प्राशन से 112 बालक लाभ ले चुके हैं।
आधुनिक दृष्टिकोणः क्यों जरूरी है पंचकर्म?
शिविर के मुख्य चिकित्सकों ने रविवार को आयोजित परिचर्चा में पंचकर्म की महत्ता बताते हुए आधुनिक वैज्ञानिक तथ्य साझा किए। उपनिदेशक डॉ. वीरेंद्र कुमार सोहाया ने बताया कि टॉक्सिन डिटॉक्सिफिकेशन वह जो आज के प्रदूषित वातावरण और प्रोसेस्ड फूड से शरीर में जमा होने वाले ’फ्री रेडिकल्स’ को पंचकर्म की पांच क्रियाएं (वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य, रक्तमोक्षण) शरीर से बाहर निकालती हैं।
इसी प्रकार मेटाबॉलिक रिसेट वह है जिसे आधुनिक विज्ञान ’मेटाबॉलिक सिंड्रोम’ (मोटापा, शुगर, बीपी) कहता है। पंचकर्म उसे जड़ से ठीक करने के लिए शरीर की अग्नि (डमजंइवसपेउ) को पुनर्जीवित करता है। इसी प्रकार तनाव मुक्ति यानि स्ट्रेस मेनेजमेंट शिरोधारा’ और ’अभ्यंग’ जैसी प्रक्रियाएं आधुनिक समय की मानसिक थकान, अनिद्रा और एंग्जायटी को दूर करने में किसी भी आधुनिक दवा से अधिक प्रभावी और सुरक्षित हैं।वहीं इम्युनिटी बूस्टरः में यह पद्धति शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है, जिससे बार-बार होने वाले संक्रमणों से बचाव होता है। शिविर 31 जनवरी तक आयोजित होगा। इसमें प्रतिदिन रोगियों की भीड़ उमड़ रही है।
Author: Third Eye News 24
सत्यमेव जयते




