बारां। कूनो नेशनल टाइगर रिजर्व पार्क मध्यप्रदेश से के पी टू चीते के बारां जिले के रामगढ़ संरक्षित वन अभ्यारण्य क्षेत्र में आगमन पर बारां जिले भर में पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव संरक्षण के उद्देश्य से कार्य कर रहे वन्य जीव प्रेमियों ने प्रसन्नता व्यक्त कर जिला वन अधिकारी को ज्ञापन देकर केपी टू चीते के साथ ट्रेंकुलाइज पद्धति काम नहीं लेने की मांग की है।
अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस और वन्य जीव संरक्षण दिवस की पूर्व संध्या पर जिले के शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन की नेतृत्व कर रही शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति बारां के संरक्षक, इंटेक बारां चैप्टर के सदस्य प्रशांत पाटनी की अगुवाई में सदस्यों ने उप वन संरक्षक बड़े विवेकानंद को ज्ञापन सौंपा।
शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति बारां के संरक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत पाटनी ने कहा कि बारां जिले की रामगढ़ क्षेत्र में कूनो रेंज से घूमकर चीते स्वाभाविक और प्राकृतिक तरीके से चलकर बारां जिले के शाहबाद रिजर्व फॉरेस्ट में तथा उससे सटे क्षेत्र में मूवमेंट कर रहा है,यह हम सभी जिले एवं राजस्थान भर के पर्यावरण प्रेमियों के लिए उत्साहवर्धक है।”
उन्होंने कहा कि”शाहबाद संरक्षित वन अभ्यारण्य क्षेत्र कूनो टाइगर रिजर्व से मात्र 40 किमी की दूरी पर है जहां से गांधी सागर तक प्रस्तावित चीता कॉरिडोर के तहत चीतों की आवाजाही चिन्हित है और यहां का प्राकृतिक परिवेश चीतों को अनुकूलन प्रदान करता है।” समिति के प्रवक्ता और इंटेक बारां चैप्टर के कन्वीनर जितेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा है “कूनो सेंचुरी से चीता पांचवी बार बारां जिले के वन क्षेत्र में आया है।यह चीते का सहज, स्वाभाविक और प्राकृतिक मूवमेंट है ।चीतों के लिए बारां की वानिकी परिधि अनुकूलन और उनके आहार विहार से प्रचुर रूप से संपन्न है। उनके लिए ट्रेंकुलाइजर पद्धति के स्थान पर प्राचीन परंपरागत और प्राकृतिक रूप से अपनाई जाने वाली पिंजरा पद्धति को अपनाया जाना ज्यादा उचित है।क्रूर और अप्राकृतिक पद्धति का उपयोग नहीं करना ही सच्चे मायनों में अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस की सार्थकता है।”
Author: Neeta Sharma
free Lancer, writer and editor





One response to “अफ्रीकी मेहमान को बारां के जंगलों में रोके जाने की मांग”
vajib mang he. sabhi baran vasiyon ko awaj buland krni chahiy.