बारां। श्री सिद्दीक बाबा लोक कल्याण संस्थान, बारां एवं साम्प्रदायिक सद्भावना संस्थान, बारां के संयुक्त तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय समन्वयी संत, “मिशन ऑफ कम्युनल हार्मनी” के प्रणेता सिद्दीक बाबा के जन्मोत्सव एवं गुरुपूर्णिमा महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय सांप्रदायिक सद्भावना समारोह का दूसरा एवं अंतिम दिवस श्रद्धा, आध्यात्मिक वातावरण और सर्वधर्म समभाव की भावना के साथ सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रातः 11 बजे हवन से हुआ। इसके उपरांत दोपहर 12 बजे पवित्र कुरआन शरीफ का ख्वानी, 12:30 बजे गुरु ग्रंथ साहिब एवं पवित्र बाइबिल का पाठ किया गया। तत्पश्चात सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद एवं भोजन कराया गया।
सायंकाल आयोजित गुरुपूर्णिमा उत्सव एवं आरती के दौरान सिद्दीक बाबा का संदेश श्रद्धालुओं के समक्ष वाचन किया गया। संदेश में कहा गया कि _”समस्त चर-अचर जगत एकमात्र परमात्मा से उत्पन्न हुआ है और उसी एक शक्ति के विभिन्न रूप हैं। कोई उसे ईश्वर कहता है, कोई अल्लाह, कोई गॉड तो कोई निरंकार। मानवता मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है। हमें सम्प्रदायों के स्थान पर मानवता को स्थान देना चाहिए।”_
इसके पश्चात आयोजित सर्वधर्म समभाव संगोष्ठी में विभिन्न धर्मों एवं समाजों के प्रतिनिधियों, संत-महात्माओं तथा प्रबुद्धजनों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की संस्कृति विविधता में एकता और परस्पर सम्मान की भावना पर आधारित है। समाज में प्रेम, भाईचारे, सहिष्णुता और आपसी सद्भाव को मजबूत बनाने के लिए ऐसे आयोजनों की निरंतर आवश्यकता है।
समारोह का समापन सायंकाल सामूहिक प्रसाद वितरण के साथ हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा नगरवासी उपस्थित रहे। आयोजन के सफल संचालन में संस्थान के पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवकों का विशेष योगदान रहा।
क्या इसका *150 शब्द का छोटा वर्जन* भी बना दूं पत्रिका के लिए?
Author: नीता शर्मा
free Lancer, writer and editor



