शहर के बढ़ते तापमान पर चिंता जताई चम्बल संसद ने
पेड़ों को हर संभव बचाने की मांग की।
केडीए आयुक्त से हस्तक्षेप की मांग
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कोटा। चम्बल संसद और कोटा एनवायरनमेंटल सेनीटेशन सोसायटी के शिष्टमंडल ने बुधवार को बढ़ते तापमान के दौर में
शहर में पेड़ों की कटाई, सीमेंट कंक्रीट इंटरलाकिंग टाईल्स में दाब कर मारने और ट्री गार्ड में दम घुटने से पेड़ों की मौत,ने पौधारोपण के लिए जमीन का अभाव आदि समस्याओं के समाधान की कोटा विकास प्राधिकरण आयुक्त वचनेश अग्रवाल से मांग की। चम्बल संसद अध्यक्ष के बी नंदवाना, संयोजक बृजेश विजयवर्गीय,संरक्षक जीडी पटेल, यज्ञदत्त हाडा ने कहा कि प्राधिकरण
कोटा विकास प्राधिकरण के गठन के बाद शहर के सभी गार्डन की देखभाल का जिम्मा केडीए के पास आ गया है इस संदर्भ में सुझाव है कि शहर में ज्यादा से ज्यादा हरियाली और पेड़ पौधे विकसित किए जाए। उसके लिए सबसे पहले आवश्यक है कि पेड़ों की अवैध कटाई को तुरंत बंद किया जाए छंटाई के नाम पर पेड़ों की कटाई शहर में बहुत होती है और इससे हजारों पेड़ों को बैमोत मरने पर मजबूर कर दिया जाता है।
शहर में अनावश्यक सीमेंट कंक्रीट के स्ट्रक्चर्स के कारण पेड़ लगा लगाने की जगह के न के बराबर बची है बाजारों में लोग पेड़ लगे नहीं देते लगे हुए हैं उनको भी काट डालते हैं उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती हमारा आपसे विनम्र अनुरोध है कि प्रमुख सड़कों पर डिवाइडरों में बड़े व परंपरागत पेड़ लगाए जाएं। आवश्यकता हो तो डिवाइडरों को री डिजाइन किया जाए। चम्बल संसद ने कहा कि
-लोगों को पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए एवं जो लोग पेड़ लगाते हैं उनको केडीए का सहयोग मिलना चाहिए जो अभी नहीं मिलता।
शहर की सीमा में पेड़ों के लिए सबसे बड़ा खतरा अनावश्यक सीमेंट कंक्रीट ,इंटरलाकिंग टाईल्स बिछाना हो गया है। ज्यादातर देखने में आया है कि सीमेंट कंक्रीट के कारण पेड़ों का दाम घट जाता है उनकी जड़ें खोखली हो जाती है और कुछ ही समय में पेड़ मर जाते हैं हमारा अनुमान है कि शहर में पिछले 10 साल में एक लाख से अधिक पेड़ इसी सीमेंट कंक्रीट के कारण मर गए। विकास कार्यों को करने वाले इंजीनियरों को निर्देश दिया जाए कि किसी भी स्थिति में पेड़ को बचाया जाए। अनावश्यक सीमेंट कंक्रीट , टाईल्स के काम नहीं किया जाए जहां पर हो गया है उनको हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए ,ताकि पेड़ों को लगाने की जगह बन सके।
-पेड़ों की छंटाई एवं बहुत आवश्यक होने पर ही कटाई की जाए सक्षम अधिकारी की देखरेख में। कोटा में बिजली विभाग नगर निगम एवं केईडीएल भी बिना किसी सक्षम अनुमति के बेदर्दी पेड़ों की छंटनी कर देती है जिससे कि बाद में वे मर जाते हैं।शहर के चौराहों पर स्ट्रक्चर बनाने के बजाय हरे-भरे पेड़ लगाए जाएं
कई पेड़ जो बड़े हो चुके हैं ट्री गार्डों के कारण उनका दम घुट रहा है ऐसे ट्री गार्डों को हटाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाए । शहर में 40000 से अधिक ट्री गार्ड ऐसे हैं जो अनुपयोगी हो चुके हैं उनको निकाल कर उन्हें पुनः नए पेड़ों को लगाने में काम लिया जा सकता है।
केईएसएस सचिव विनीत महोबिया ने कहा कि बनाए गए ट्री गॉर्ड्स तकनीकी दृष्टि से ठीक नहीं है उनकी लंबाई और चौड़ाई भी ठीक नहीं है ट्री गार्ड लगने के बाद पौधों की निराई गुड़ाई संभव नहीं है इसलिए आवश्यक है कि ट्री गार्ड लोहे के बजाय बांस के बनाए जाएं । जिनको खोलने और वापस लगाना आसान हो और ये ट्री गार्ड मंहगे भी नहीं होते। आयुक्त को बताया कि
पेड़ों और झाड़ियों में अंतर होता है पूर्व में नगर विकास न्यास द्वारा झाड़ियों को ही पेड़ मान लिया गया और सौंदर्य करण के नाम पर लगा दी गई, जबकि पेड़ लगने चाहिए थे।
कोटा विकास प्राधिकरण चाहे वन विभाग को भी इसमें शामिल किया जा सकता है उनके पास पेड़ लगाने की विशेषज्ञता हासिल है।
शहर में लगे हुए पेड़ों की नंबरिंग की जाए उन पर नंबर डाले जाए ताकि कोई काटने की या नुकसान पहुंचाने की कोशिश ना करें। संयोजक बृजेश विजयवर्गीय ने बताया कि
कोटा विकास प्राधिकरण का यह प्रयास शहर में बढ़ती भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान और प्रदूषण को नियंत्रित करने में बहुत मदद करेगा। विकास प्राधिकरण को पेड़ पौधों के के रक्षक के रूप में सामने आना चाहिए इसकी आपसे अपेक्षा है। यदि हम वास्तव में शहर के तापमान को नियंत्रित रखना चाहते हैं एवं वास्तव में सौंदर्यीकरण चाहते हैं तो कोटा विकास प्राधिकरण को इन सुझावों पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। शिष्टमंडल में,सर्प विशेषज्ञ डा विनीत महोबिया, वरिष्ठ जन कल्याण समिति के एसके अग्रवाल, राजेंद्र जैन,समाज सेवी पर्यावरण गतिविधियों के बनवारी लाल पंचौली,अरुण भार्गव आदि प्रमुख थे। केडीए सचिव ने तलवंडी में परशुराम सर्किल पर पेड़ों को नुकसान पहुंचाने पर अफसोस जाहिर कर अधिकारियों को पाबंद किया है कि आगे से ध्यान रखा जाएगा।
चम्बल प्रदूषण पर चिंता जताई
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अग्रवाल ने चम्बल को प्रदूषण मुक्त करने संबंधी सुझावों पर अमल करने का आश्वासन दिया। पर्यावरणीय समस्याओं पर शीघ्र बैठक बुलाई जाएगी।
Author: Neeta Sharma
free Lancer, writer and editor



