जयपुर,19 मार्च।
कूनो नेशनल पार्क से भटक कर केपी-3चीता अपने भाई को तलाशता हुआ बारां जिले के शेरगढ़ (कोषवर्धन) के जंगल में पहुंच गया है। बाघ -चीता मित्र के सह संयोजक डॉ कृष्णेंद्र सिंह एवं वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ विनीत महोबिया ने बताया कि शेरगढ़ का जंगल चीतों की बसावट के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
कुंजेड़ सरपंच प्रतिनिधि, शाहबाद घाटी संघर्ष समिति के संरक्षक प्रशांत पाटनी ने शेरगढ़ अभयारण्य में चीता केपी-3 को स्थायी रूप से बसाने की मांग की है। चीता केपी-3 के प्राकृतिक कॉरिडोर से 100 किलोमीटर की दूरी तय कर शेरगढ़ पहुंचने के बाद यfह मांग जोर पकड़ रही है। पाटनी ने बताया कि कूनो में इनकी संख्या बढ़ रही है तो हाड़ौती में स्वागत होना चाहिए।
पाटनी और होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान के जिला अध्यक्ष हरिओम अग्रवाल ने वन विभाग से अपील की है। उनका तर्क है कि “चीता ने इस क्षेत्र को अपने अनुकूल साबित किया है, क्योंकि यहां पर्याप्त घास के मैदान और शिकार उपलब्ध हैं।”
प्रशांत पाटनी ने बताया कि “चीता बसाने के लिए सरकार करोड़ों रुपये परिवहन पर खर्च करती है। ऐसे में जब चीता केपी-3 स्वयं शेरगढ़ पहुंच गया है, तो उसे स्थायी रूप से वहीं बसाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चीते के संरक्षण से वन्यजीवों को सुरक्षा मिलेगी और शेरगढ़ अभयारण्य पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बना सकेगा।”
इस आशय को लेकर पूर्व में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और सांसद दुष्यंत सिंह को ज्ञापन दिए जा चुके हैं। पाटनी ने यह भी बताया कि सरकार ने चीता कॉरिडोर बनाने पर 13 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, इसलिए अब उसे स्थायी आवास दिया जाना चाहिए। चम्बल संसद ने राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा से इस बारे में चर्चा की है उन्होंने भी चीता के हाड़ौती में प्रवेश को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की है। राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक पीके उपाध्याय से भी चीता को शेरगढ़ में ही बसाने की मांग की है।
उप वन संरक्षक वन्यजीव अनुराग भटनागर ने पुष्टि की है कि शेरगढ़ का जंगल चीता को रखने में हर दृष्टि से सक्षम है । बृजेश विजयवर्गीय संयोजक बाघ चीता मित्र ने कहा कि ” चीतों को लेकर यहां के वन्य जीव प्रेमियों में खासा उत्साह है । चीते के मूवमेंट से शाहबाद और शेरगढ़ में ट्यूरिज्म विकसित होगा और इको टूरिज्म के लिए नए द्वार खुलेंगे ।सरकार की राजस्व वृद्धि के साथ ही पर्यटकों के आने से जिले में रोजगार बढ़ेगा।”
Author: Neeta Sharma
free Lancer, writer and editor


